यूपी में तीन नए विश्वविद्यालयों के निर्माण में देरी पर मुख्य सचिव सख्त, इस दिन तक काम पूरा करने का दिया अल्टीमेटम
16 अप्रैल 2026
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने उत्तर प्रदेश के तीन निर्माणाधीन विश्वविद्यालयों के काम में धीमी प्रगति पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने 31 मई तक कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में हो रही देरी पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने मिर्जापुर, मुरादाबाद और बलरामपुर में निर्माणाधीन तीन नए राज्य विश्वविद्यालयों के काम की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को 31 मई तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की बैठक में प्रदेश में चल रही विश्वविद्यालय निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान दिए गए। समीक्षा में यह बात सामने आई कि तीनों विश्वविद्यालयों का निर्माण कार्य अपनी मूल समय सीमा से काफी पीछे चल रहा है। मां विंध्यवासिनी राज्य विश्वविद्यालय, मीरजापुर का काम 11 फरवरी, 2026 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक केवल 76 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इसी प्रकार, मुरादाबाद में बन रहे गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय का निर्माण 23 फरवरी, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य था, जबकि इसकी वर्तमान प्रगति 78.53 प्रतिशत है। वहीं, मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय, बलरामपुर का निर्माण कार्य 6 दिसंबर, 2025 तक पूरा होना था, लेकिन यह भी अभी 81.50 प्रतिशत पर ही अटका हुआ है।
इन विश्वविद्यालयों की स्थापना प्रदेश सरकार की हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने की नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। मिर्जापुर और आसपास के अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए महानगरों में जाने की आवश्यकता न पड़े, इसी उद्देश्य से मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की नींव रखी गई थी। इसी तरह, मुरादाबाद मंडल, जो लंबे समय तक बिना किसी सरकारी विश्वविद्यालय के था, वहां गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय की स्थापना से लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बलरामपुर में मां पाटेश्वरी देवी राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना भी क्षेत्र के शैक्षिक विकास के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है।
निर्माण कार्यों में हो रही इस देरी से न केवल इन परियोजनाओं की लागत बढ़ने की आशंका है, बल्कि इन क्षेत्रों के हजारों छात्रों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है, जो नए सत्र से इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश की उम्मीद कर रहे थे। पूर्व में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रगति संतोषजनक नहीं रही है। शासन का मानना है कि कार्यदायी संस्थाओं की सुस्ती के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजनाएं अपने लक्ष्य से भटक रही हैं।
मुख्य सचिव द्वारा दी गई नई समय सीमा के बाद अब निर्माण कार्यों में तेजी आने की प्रबल संभावना है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय में परियोजनाएं पूरी कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है और अब कोई बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लापरवाही करने वाले मुख्य अभियंता के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने और कार्यदायी संस्था पर कड़ी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसियां इस अल्टीमेटम का पालन करते हुए 31 मई तक इन विश्वविद्यालयों को अंतिम रूप दे पाती हैं या नहीं।
Source: jagran