भागलपुर नगर निगम: अब बड़े व्यापारियों की जेब होगी ढीली, ट्रेड लाइसेंस शुल्क के नए स्लैब की तैयारी
16 अप्रैल 2026
भागलपुर नगर निगम ट्रेड लाइसेंस शुल्क स्लैब में बदलाव कर रहा है। अब बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अधिक शुल्क देना होगा। 25-50 लाख टर्नओवर पर 5000 रुपये और 50 लाख से अधिक पर 10000 रुपये वार्षिक शुल्क प्रस्तावित है।
भागलपुर नगर निगम अपने राजस्व को बढ़ाने और शहर के विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है। निगम प्रशासन अब शहरी क्षेत्र में चल रहे व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए ट्रेड लाइसेंस शुल्क की दरों में बदलाव करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत विशेष रूप से बड़े कारोबारियों पर शुल्क का बोझ बढ़ने की संभावना है, जबकि छोटे व्यापारियों को نسبتاً राहत मिल सकती है। इस प्रस्ताव को जल्द ही निगम की सामान्य बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
वर्तमान में, भागलपुर नगर निगम दस लाख रुपये तक के सालाना कारोबार वाले व्यापारियों से एक हजार रुपये और इससे अधिक के टर्नओवर पर 2500 रुपये वार्षिक शुल्क लेता है। प्रस्तावित नए स्लैब के अनुसार, जिन प्रतिष्ठानों का वार्षिक कारोबार 25 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है, उन्हें 5000 रुपये का शुल्क देना होगा। वहीं, 50 लाख रुपये से अधिक का सालाना कारोबार करने वाले बड़े व्यावसायिक संस्थानों को अब 10,000 रुपये वार्षिक ट्रेड लाइसेंस शुल्क के रूप में चुकाने होंगे। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य निगम की आय में वृद्धि करना है, जिससे शहर की बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
निगम प्रशासन इस नई शुल्क संरचना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है। बड़े व्यापारियों और प्रतिष्ठानों की सटीक पहचान के लिए आयकर और सेल्स टैक्स विभाग से सूची प्राप्त करने की योजना है। इसके अतिरिक्त, निगम अपने स्तर पर भी तहसीलदारों के माध्यम से वार्ड-वार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वेक्षण और मूल्यांकन करवा रहा है। अब तक के सर्वे के आधार पर लगभग 17,000 प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की जा चुकी है, जबकि पूरे शहर में लगभग 30,000 दुकानों का आकलन किया गया है। इस व्यापक सर्वेक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के न चले।
यह कदम निगम के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत साबित हो सकता है। अनुमान है कि ट्रेड लाइसेंस शुल्क से निगम को लगभग दो करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है, जिसका सीधा उपयोग शहर के विकास कार्यों, जैसे कि सड़कों की मरम्मत, स्वच्छता व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा। पिछले वर्ष तक निगम द्वारा लगभग छह हजार ट्रेड लाइसेंस ही जारी किए गए थे, लेकिन ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और सख्ती के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 13 हजार को पार कर गया है। निगम का लक्ष्य सभी प्रतिष्ठानों को लाइसेंस के दायरे में लाना है।
नगर निगम ने उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है जो बिना ट्रेड लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। ऐसे दुकानदारों को नोटिस भेजकर चेतावनी दी जा रही है और यदि वे जल्द ही लाइसेंस प्राप्त नहीं करते हैं, तो उनके प्रतिष्ठानों को सील करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल निगम की आय बढ़ाना है, बल्कि शहर में व्यावसायिक गतिविधियों को विनियमित करना और एक पारदर्शी प्रणाली स्थापित करना भी है, जिससे सभी व्यापारियों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित हो सके।
Source: jagran