विद्युत नियामक आयोग का कड़ा रुख, नए कनेक्शन सिर्फ प्रीपेड मोड में दिए जाने पर यूपी पावर कॉरपोरेशन से मांगा जवाब

16 अप्रैल 2026

विद्युत नियामक आयोग का कड़ा रुख, नए कनेक्शन सिर्फ प्रीपेड मोड में दिए जाने पर यूपी पावर कॉरपोरेशन से मांगा जवाब

विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में बिजली कंपनियों की मनमानी पर गंभीर रुख अपनाया है।

उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन देने और पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा नए कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में ही जारी करने की नीति पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में यूपीपीसीएल प्रबंधन से दस दिनों के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है, जिससे बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

यह पूरा विवाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा नियामक आयोग के समक्ष एक याचिका दायर करने के बाद शुरू हुआ। परिषद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि यूपीपीसीएल विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। शिकायत के अनुसार, बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही मौजूदा पोस्टपेड कनेक्शनों को जबरन प्रीपेड मोड में बदल रही हैं और नए आवेदकों को पोस्टपेड कनेक्शन का विकल्प नहीं दिया जा रहा है। उपभोक्ता परिषद ने इसे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन बताया है, क्योंकि नियम के अनुसार मीटर का प्रकार चुनने का अधिकार उपभोक्ता के पास होना चाहिए।

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा हाल ही में जारी की गई एक अधिसूचना है, जिसमें कथित तौर पर प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस अधिसूचना के बावजूद, उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियां लगातार प्रीपेड मीटर लगाने की अपनी नीति पर कायम हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं। उपभोक्ता परिषद ने इसी केंद्रीय अधिसूचना का हवाला देते हुए आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने यह कदम उठाया है।

इस विवाद के केंद्र में स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं, जिन्हें बिजली सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाता है। इन मीटरों से बिजली कंपनियों को राजस्व वसूली में आसानी होती है और घाटे को कम करने में मदद मिलती है। उपभोक्ता भी अपने बिजली खर्च पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं। हालांकि, अनिवार्य रूप से इन्हें थोपने की नीति का व्यापक विरोध हो रहा है। कई उपभोक्ताओं और संगठनों का मानना है कि रिचार्ज खत्म होने पर अचानक बिजली कट जाने जैसी समस्याओं के कारण यह व्यवस्था सभी के लिए, विशेषकर ग्रामीण और निम्न-आय वाले परिवारों के लिए, व्यावहारिक नहीं है।

अब सभी की निगाहें नियामक आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। यूपी पावर कॉर्पोरेशन द्वारा दिए जाने वाले जवाब की समीक्षा के बाद आयोग यह तय करेगा कि क्या बिजली कंपनियों की मौजूदा नीति कानून के दायरे में है या नहीं। यदि आयोग उपभोक्ता परिषद के तर्कों से सहमत होता है, तो यूपीपीसीएल को अपनी नीति में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को एक बार फिर पोस्टपेड और प्रीपेड कनेक्शन के बीच चयन करने का विकल्प मिल सकेगा। इस फैसले का प्रदेश में बिजली वितरण और उपभोक्ता अधिकारों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API