उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने संभाला जल संसाधन विभाग का जिम्मा, प्रधान सचिव ने मांगे सुधार के सुझाव
16 अप्रैल 2026
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने जल संसाधन विभाग का कार्यभार संभाला। प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने विभागीय कार्यों की प्रगति पर बैठक की और अधिकारियों से सुधार हेतु तीन दिन में सुझाव मांगे।
बिहार सरकार में हुए हालिया बदलावों के तहत, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने जल संसाधन विभाग के मंत्री के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस नए दायित्व को संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस पहली ही बैठक में चौधरी ने स्पष्ट कर दिया कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त कार्य-संस्कृति और जनसमस्याओं का समय पर समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने अधिकारियों को राज्य के विकास के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।
यह पदभार ग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब बिहार बाढ़, सूखा और सिंचाई जैसी बहुआयामी जल चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और बड़ी आबादी की आजीविका सीधे तौर पर जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर निर्भर करती है। उपमुख्यमंत्री चौधरी, जो अपनी अनुभवी और संतुलित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, पर इन जटिल समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने की एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने पूर्व में भी वित्त, शिक्षा और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि वे जल संसाधन विभाग में भी एक नई दिशा देंगे।
बैठक के दौरान, प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने विभागीय कार्यों को और बेहतर बनाने के लिए एक अनूठी पहल की। उन्होंने विभाग के सभी अभियंताओं और पदाधिकारियों से लिखित रूप में सुधार के लिए सुझाव मांगे हैं। इसके लिए तीन दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है, ताकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के अनुभवों और विचारों को सीधे नीति-निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। प्राप्त सुझावों को संकलित कर उन पर विचार किया जाएगा और उपयुक्त प्रस्तावों को कार्यान्वयन में शामिल किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य विभाग में एक सकारात्मक और सहभागितापूर्ण कार्य वातावरण बनाना है।
विभाग के सामने कई प्रमुख चुनौतियां हैं, जिनमें आगामी मानसून के दौरान बाढ़ प्रबंधन एक तात्कालिक प्राथमिकता है। कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियाँ हर साल बड़े पैमाने पर तबाही का कारण बनती हैं। इसके अलावा, 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करना भी एक बड़ी चुनौती है। राज्य में कई सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से चल रही हैं, जिन्हें पूरा करने और पुरानी नहर प्रणालियों के आधुनिकीकरण की तत्काल आवश्यकता है। इन परियोजनाओं में उत्तर कोयल जलाशय परियोजना जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण योजनाएं भी शामिल हैं, जिन पर केंद्र सरकार की भी नजर है।
आने वाले दिनों में, उपमुख्यमंत्री और उनका विभाग प्राप्त सुझावों के आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। उम्मीद है कि इसमें बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, नदियों की गाद हटाने की योजना और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग शामिल होगा। विश्व बैंक की सहायता से चल रही 'बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना' जैसी पहलों से भी इन प्रयासों को बल मिलेगा। विजय चौधरी के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह न केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि बिहार के जल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक दीर्घकालिक और स्थायी रणनीति भी विकसित करेगा।
Source: jagran