वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम पर कार्यशाला में डॉ. एन. विजयालक्ष्मी ने कहा- सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास

16 अप्रैल 2026

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम पर कार्यशाला में डॉ. एन. विजयालक्ष्मी ने कहा- सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास

योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II को सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर हुई एक महत्वपूर्ण कार्यशाला में सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र और सतत विकास पर जोर दिया गया है। योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव, डॉ. एन. विजयालक्ष्मी ने इस कार्यक्रम को सीमांत इलाकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समन्वित प्रयासों, डेटा-आधारित निगरानी और जमीनी स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण के माध्यम से योजना के लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करना सुनिश्चित करें। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर विकास कार्यों में तेजी लाना था।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक केंद्र-प्रायोजित योजना है, जिसकी घोषणा वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तरी सीमा पर स्थित गांवों का व्यापक विकास करना और वहां के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2967 गांवों की पहचान की गई है। इस योजना के लिए 2022-23 से 2025-26 तक की अवधि के लिए 4800 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, जिसमें से एक बड़ी राशि सड़कों के निर्माण पर खर्च होगी।

इस कार्यक्रम का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुआयामी रणनीति पर केंद्रित है। इसमें स्थानीय, प्राकृतिक और मानव संसाधनों के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है। कार्यक्रम के तहत पर्यटन, कौशल विकास, उद्यमिता और 'एक गांव, एक उत्पाद' की अवधारणा पर आधारित कृषि-व्यवसायों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका एक प्रमुख लक्ष्य इन क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकना है, ताकि सीमावर्ती गांव आबाद रहें और सीमा सुरक्षा को मजबूती मिले। स्थानीय निवासियों को सशक्त बनाकर उन्हें सीमा सुरक्षा बलों के "आंख और कान" के रूप में विकसित करने की भी परिकल्पना है।

कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतें मिलकर काम कर रही हैं। जिला प्रशासन को ग्राम पंचायतों की सहायता से 'वाइब्रेंट विलेज एक्शन प्लान' बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि विकास की जरूरतें स्थानीय स्तर पर तय की जा सकें। कार्यशाला में गृह विभाग और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) जैसे सुरक्षा से जुड़े हितधारकों ने भी हिस्सा लिया, जिससे विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय को सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया है।

इस कार्यशाला के बाद अब सभी संबंधित विभागों और जिला अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे चिन्हित गांवों के लिए बनाई गई विकास योजनाओं पर तेजी से काम करेंगे। कार्यक्रम की सफलता प्रभावी निगरानी और योजनाओं के धरातल पर उतरने पर निर्भर करेगी। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से न केवल इन दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्रों को देश की मुख्यधारा से एकीकृत करने और उन्हें आत्मनिर्भर, समृद्ध और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Source: jagran

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The World Dispatch

Source: World News API