इजरायल और लेबनान में 10 दिनों का संघर्ष विराम, ट्रंप ने किया ऐलान, बोले- मैं 10 युद्ध रुकवा चुका
16 अप्रैल 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष 10 दिनों के लिए संघर्ष विराम पर सहमत हुए हैं। यह संघर्ष विराम हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान में सैकड़ों लेबनानी नागरिकों की मौत के बाद हुआ है। ट्रंप ने इसका पूरा श्रेय भी लिया है।
पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर आई है, जहां इजरायल और लेबनान दस दिनों के संघर्ष विराम के लिए सहमत हो गए हैं। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की घोषणा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, जिन्होंने दावा किया कि यह शांति की दिशा में एक बड़ा कदम है और उन्होंने अब तक ऐसे दस युद्ध रुकवाए हैं। यह संघर्ष विराम ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल और ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के बीच एक महीने से अधिक समय से सीमा पर भीषण लड़ाई चल रही थी, जिसने पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की आशंका में डाल दिया था।
यह समझौता वाशिंगटन में अमेरिकी मध्यस्थता के बाद संभव हुआ, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने दशकों बाद सीधी बातचीत की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के साथ सफल बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों नेता संघर्ष विराम के लिए राजी हुए। ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए दोनों नेताओं को आगे की बातचीत के लिए व्हाइट हाउस में आमंत्रित करने की भी घोषणा की है। यह 1983 के बाद पहली बार होगा जब दोनों देशों के शीर्ष नेता इस तरह की किसी सार्थक वार्ता के लिए एक साथ आएंगे।
इस संघर्ष की जड़ें काफी गहरी हैं और इसका हालिया दौर अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद तेज हुआ था। हमास के समर्थन में हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले और जमीनी अभियान चलाए। इस लड़ाई में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ और हजारों लोग विस्थापित हुए। हाल के हफ्तों में यह लड़ाई और भी गंभीर हो गई थी, जिससे एक पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा था। ऐसे में इस दस दिवसीय युद्धविराम को तनाव कम करने के एक महत्वपूर्ण मौके के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस संघर्ष विराम की राह आसान नहीं है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम के बावजूद इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में बनाए गए 10 किलोमीटर के सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी। उनका कहना है कि यह बफर जोन उत्तरी इजरायल को हिजबुल्लाह के हमलों से बचाने के लिए जरूरी है। वहीं, लेबनान की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिजबुल्लाह को नियंत्रित करने की है, जो एक शक्तिशाली सशस्त्र समूह है और सरकार से स्वतंत्र रूप से काम करता है। हिजबुल्लाह ने कहा है कि संघर्ष विराम का टिकना इजरायल के रवैये पर निर्भर करेगा।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह दस दिनों का अस्थायी ठहराव एक स्थायी शांति की राह बना पाएगा। इस समझौते में अमेरिका ने छह सूत्रीय योजना पेश की है, जिसमें इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता दी गई है, जबकि लेबनान पर हिजबुल्लाह जैसी ताकतों को रोकने की जिम्मेदारी डाली गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष विराम सफल रहता है और बातचीत आगे बढ़ती है, तो इसका सकारात्मक असर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण वार्ता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, यह नाजुक शांति उम्मीद की एक किरण लेकर आई है, लेकिन इसकी सफलता सभी पक्षों के संयम और आगे की कूटनीतिक प्रगति पर निर्भर करेगी।
Source: navbharattimes