पाकिस्तान पर नहीं भरोसा या ट्रंप धोखेबाज? क्या अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा होगी बातचीत, शहबाज सरकार ने दिया जवाब
16 अप्रैल 2026
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तान ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के लिए अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी का यह बयान उन खबरों के बीच आया है कि पाकिस्तानी पक्ष की ओर से ईरानी नेतृत्व सहित क्षेत्रीय नेताओं के साथ किए गए हालिया संपर्क के बाद बातचीत का एक और दौर संभव है. बातचीत के दूसरे दौर की संभावना को खारिज करने से परहेज करते हुए कहा, 'अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है.'</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दूसरे दौर की वार्ता को लेकर क्या बोला पाकिस्तान</strong></p> <p style="text-align: justify;">अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर के लिए प्रतिनिधिमंडलों के आगमन से जुड़े सवालों पर अंद्राबी ने कहा, 'कौन आएगा, प्रतिनिधिमंडल कितना बड़ा होगा, कौन रुकेगा और कौन जाएगा, यह दोनों पक्षों को तय करना है.' उन्होंने कहा, 'हमारे यहां जो बातचीत हुई, उससे संबंधित जानकारी हमें बातचीत करने वाले पक्षों ने सौंपी थी.' अंद्राबी ने ये भी कहा कि परमाणु मुद्दा उन विषयों में से एक है जिन पर देशों द्वारा चर्चा की जा रही है.</p> <p style="text-align: justify;"><a title="पाकिस्तान" href="https://www.abplive.com/news/world/us-iran-ceasefire-pakistan-in-tension-shehbaz-sharif-visits-middle-east-asim-munir-in-tehran-3116298" target="_self">पाकिस्तान</a> के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम तेहरान और वार्ता में शामिल पक्षों के रुख पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. यह हम पर पक्षों के भरोसे का हिस्सा है.' ताहिर अंद्राबी ने कहा, 'दोनों पक्षों के बीच बातचीत उच्च स्तर के विश्वास और गोपनीयता के साथ होगी. शांति वार्ता के लिए लेबनान में शांति जरूरी है.' उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जबकि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ईरान गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/cAnurNquBnw?si=Cmtu73ABFe8Tm4PT" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p> <p style="text-align: justify;"><strong>सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए: पाकिस्तान</strong></p> <p style="text-align: justify;">जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को वार्ता के अगले दौर से पहले आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं. एक दिन पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति <a title="डोनाल्ड ट्रंप" href="https://www.abplive.com/topic/donald-trump" data-type="interlinkingkeywords">डोनाल्ड ट्रंप</a> ने कहा था कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में इस्लामाबाद में आयोजित किया जा सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें : <a href="https://www.abplive.com/news/world/dgmo-arrived-in-tehran-alongside-asim-munir-briefed-iranian-officials-regarding-military-deployment-in-saudi-arabia-middle-east-conflict-iran-us-war-3116249">सऊदी में फाइटर जेट की तैनाती के बाद आंखों की किरकिरी बना पाकिस्तान? आसिम मुनीर भागे-भागे पहुंचे ईरान</a></strong></p>
अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं, जिसमें पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका में उभरकर सामने आया है। शहबाज शरीफ सरकार ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह दोनों देशों के बीच किसी भी वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में भरोसे का संकट एक बड़ी बाधा बना हुआ है, जिसकी जड़ें पूर्व के समझौतों और कूटनीतिक दांवपेंचों से जुड़ी हैं। दोनों देशों के बीच संवाद की यह नाजुक कोशिश एक ऐसे समय में हो रही है, जब पिछला परमाणु समझौता टूटने के बाद से दोनों के संबंध ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण बने हुए हैं।
पाकिस्तान इस कूटनीतिक प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पाकिस्तानी नेतृत्व ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देशों की यात्राएं की हैं, ताकि एक व्यापक सहमति बनाई जा सके और तनाव को कम किया जा सके। हाल ही में इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत का एक दौर आयोजित भी किया गया था, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका। इसके बावजूद, पाकिस्तान एक दूसरे दौर की वार्ता के लिए जोर दे रहा है ताकि संवाद की खिड़की खुली रहे।
इस बातचीत की राह में सबसे बड़ी रुकावट विश्वास की कमी है, जो खासकर 2018 में ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से एकतरफा हटने के बाद पैदा हुई थी। 2015 में महीनों की बातचीत के बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी, जिसके बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को "भयानक" और "एकतरफा" बताकर अमेरिका को इससे अलग कर लिया और ईरान पर कठोर प्रतिबंध फिर से लगा दिए। इस पृष्ठभूमि के कारण, ईरान अब किसी भी नए समझौते पर आगे बढ़ने से पहले सतर्क है, क्योंकि उसे डर है कि भविष्य में कोई भी अमेरिकी प्रशासन फिर से समझौते से मुकर सकता है।
शहबाज शरीफ सरकार ने अपनी भूमिका को एक सूत्रधार के रूप में परिभाषित किया है और कहा है कि वह बातचीत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को गोपनीय रखेगी, क्योंकि यह दोनों पक्षों द्वारा उन पर जताए गए भरोसे का हिस्सा है। पाकिस्तान के लिए इस मध्यस्थता के गहरे मायने हैं। ईरान के साथ एक लंबी सीमा साझा करने, अपनी नाजुक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों और क्षेत्र में अपनी भू-राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की इच्छा के कारण पाकिस्तान इस शांति प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाने को उत्सुक है। तनाव बढ़ने का सीधा असर पाकिस्तान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, इसलिए वह संघर्ष के बजाय संवाद का पक्षधर है।
फिलहाल, भविष्य अनिश्चितताओं से घिरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जहां पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना की है, वहीं पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जैसे कदम भी उठाए गए हैं। दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका इजरायल के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दे तो समझौता संभव है, लेकिन वह प्रतिबंधों में राहत जैसी अपनी मांगों पर भी कायम है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता भरोसे की खाई को पाटकर अमेरिका और ईरान को एक बार फिर बातचीत की मेज पर ला पाएगी या यह क्षेत्र एक नए टकराव की ओर बढ़ेगा।
Source: abplive