ऑक्सीजन खत्म, एंबुलेंस बनी मौत का कारण; घायल व्यक्ति ने रास्ते में तोड़ा दम
16 अप्रैल 2026
मुरादाबाद में सड़क दुर्घटना में घायल कुलदीप सिंह की एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मौत हो गई। परिजनों ने अस्पतालों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की एक और दुखद विफलता सामने आई है, जहां एक घायल व्यक्ति की समय पर इलाज और एंबुलेंस में ऑक्सीजन न मिलने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना बुधवार शाम को हुई जब पटवाई थाना क्षेत्र के अहमदनगर गाँव के निवासी 47 वर्षीय कुलदीप सिंह को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन अंत में व्यवस्था की लापरवाही ने उनकी जान ले ली।
शुरुआती इलाज के लिए कुलदीप सिंह के परिजन उन्हें पहले एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें किसी अन्य बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिवार उन्हें जिला अस्पताल ले गया। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती तो कर लिया गया, पर उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। काफी मिन्नतों और हंगामे के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया, जहाँ ले जाने के लिए परिवार ने अस्पताल के बाहर से 2,500 रुपये में एक निजी एंबुलेंस किराए पर ली।
मुरादाबाद के एक बड़े अस्पताल की ओर जाते समय रास्ते में ही एंबुलेंस में ऑक्सीजन का सिलेंडर खाली हो गया, जिससे कुलदीप की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों के शोर मचाने पर ड्राइवर ने कुछ देर के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई फिर से शुरू की, लेकिन वह जल्द ही पूरी तरह से खत्म हो गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इसके कुछ ही किलोमीटर आगे एंबुलेंस का पेट्रोल भी खत्म हो गया, जिससे वाहन बीच रास्ते में ही खड़ा हो गया। ऑक्सीजन सपोर्ट और समय पर चिकित्सीय सहायता के अभाव में कुलदीप ने अपने परिवार के सदस्यों के सामने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
इस दुखद घटना के बाद एंबुलेंस का चालक मौके से फरार हो गया, जिसके बाद गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एंबुलेंस पर लिखा मोबाइल नंबर गलत था और वाहन बरेली के एक अस्पताल के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस ने एंबुलेंस को जब्त कर लिया है और मामले की गहनता से जांच कर रही है।
इस घटना ने निजी एंबुलेंस सेवाओं के संचालन और उनकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामपुर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जिले में चल रही सभी निजी एंबुलेंसों की सूची तलब की है और आश्वासन दिया है कि मानकों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला इस बात की दर्दनाक याद दिलाता है कि कैसे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी सुविधाओं की कमी किसी की जान ले सकती है।
Source: jagran