24000 साल बाद जिंदा हुआ यह रहस्यमयी जीव: साइबेरिया की बर्फ में जमा था, वैज्ञानिकों ने फूंकी जान
16 अप्रैल 2026
वैज्ञानिकों ने 24000 साल से बर्फ में जमे एक रोटिफर को फिर से जिंदा कर इतिहास रच दिया है। यह जीव साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट में जमीन की काफी गहराई में फंसा हुआ था। इस जीव ने जिंदा होने के बाद खुद की संख्या बढ़ानी भी शुरू कर दी है। इसे विज्ञान के क्षेत्र में चमत्कारिक घटना माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों ने एक ऐसी stupendous उपलब्धि हासिल की है जो विज्ञान की सीमाओं को नई दिशा दे सकती है। रूस के साइबेरियाई इलाके में, आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट यानी स्थायी रूप से जमी हुई बर्फ की मोटी परतों के नीचे से, एक सूक्ष्म जीव को 24,000 साल बाद सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया गया है। यह बहुकोशिकीय जीव, जिसे बडेलॉइड रोटिफर के नाम से जाना जाता है, हिमयुग के समय से बर्फ में जमा हुआ था और प्रयोगशाला में गर्माहट मिलने पर न केवल फिर से जीवित हो गया, बल्कि उसने प्रजनन करना भी शुरू कर दिया, जिसने दुनिया भर के शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है।
यह महत्वपूर्ण खोज रूस के सॉयल क्रायोलॉजी लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने की। उन्होंने साइबेरिया की अलाजेया नदी के पास पर्माफ्रॉस्ट में गहरी ड्रिलिंग करके मिट्टी के नमूने एकत्र किए। रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का उपयोग करके, इन नमूनों की आयु का पता लगाया गया, जो लगभग 23,960 से 24,485 वर्ष पुरानी पाई गई। इन्हीं प्राचीन नमूनों के भीतर बडेलॉइड रोटिफर पाया गया। यह जीव आमतौर पर मीठे पानी के वातावरण में रहते हैं और अपनी अविश्वसनीय सहनशीलता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, अब तक यह माना जाता था कि वे जमने के बाद केवल एक दशक तक ही जीवित रह सकते हैं, लेकिन इस खोज ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
इस जीव के हजारों वर्षों तक जीवित रहने का रहस्य 'क्रिप्टोबायोसिस' नामक एक प्रक्रिया में छिपा है। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें जीव अपने शरीर की सभी चयापचय गतिविधियों को लगभग पूरी तरह से रोक देता है, जिससे वह मृत्यु और जीवन के बीच की स्थिति में चला जाता है। इस स्थिति में, यह अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी और पानी के अभाव जैसी जानलेवा परिस्थितियों का भी सामना कर सकता है। जब स्थितियाँ फिर से अनुकूल होती हैं, तो जीव इस निलंबित अवस्था से बाहर आकर सामान्य जीवन फिर से शुरू कर सकता है। इस मामले में, प्रयोगशाला में अनुकूल वातावरण मिलते ही रोटिफर न सिर्फ 'जाग' गया, बल्कि पार्थेनोजेनेसिस नामक प्रक्रिया के माध्यम से अलैंगिक रूप से अपनी आबादी भी बढ़ाने लगा।
इस खोज के दूरगामी प्रभाव हैं और यह कई वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए नए रास्ते खोलती है। यह हमें यह समझने में मदद करती है कि कुछ बहुकोशिकीय जीव अपने अंगों और ऊतकों को इतने लंबे समय तक बर्फ के क्रिस्टल से होने वाले नुकसान से कैसे बचा सकते हैं। अध्ययन के एक लेखक स्टैस मालविन ने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का पुख्ता सबूत है कि बहुकोशिकीय जानवर हजारों वर्षों तक क्रिप्टोबायोसिस की स्थिति में जीवित रह सकते हैं। यह शोध भविष्य में मानव कोशिकाओं और अंगों को बेहतर ढंग से संरक्षित करने की तकनीकों, यानी क्रायोप्रिजर्वेशन, के विकास में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इस प्राचीन जीव का पुनरुत्थान अस्तित्व, समय और जीवन की सीमाओं के बारे में हमारी समझ को चुनौती देता है। इसने इस संभावना पर भी बहस छेड़ दी है कि पिघलते पर्माफ्रॉस्ट से अन्य प्राचीन जीव और यहां तक कि अज्ञात वायरस भी बाहर आ सकते हैं, जिसके अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं। फिलहाल, वैज्ञानिक इस रोटिफर के जैविक तंत्र का अध्ययन करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उसने इतने लंबे समय तक खुद को कैसे संरक्षित रखा। यह अध्ययन भविष्य में न केवल जैव प्रौद्योगिकी बल्कि खगोल जीव विज्ञान के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जो अन्य ग्रहों पर जीवन की खोज से संबंधित है।
Source: navbharattimes