पीएमसीएच में सांस-फेफड़ा रोगियों को अब मिलेगा तुरंत उपचार, 24 घंटे रेस्पिरेटरी इमरजेंसी शुरू
16 अप्रैल 2026
राजधानी पटना में बढ़ते प्रदूषण और मौसम बदलाव के कारण श्वास रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए पीएमसीएच ने अब 24 घंटे रेस्पिरेटरी इमरजेंसी सेवा शुरू की है।
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) ने सांस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अस्पताल ने अब चौबीसों घंटे चलने वाली एक समर्पित रेस्पिरेटरी (श्वसन) इमरजेंसी सेवा की शुरुआत की है। यह सुविधा विशेष रूप से उन रोगियों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी, जिन्हें अचानक गंभीर चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है और उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ता था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजधानी पटना में बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम के कारण तेजी से बढ़ रही श्वास रोगियों की संख्या को तत्काल और विशेषज्ञ उपचार प्रदान करना है।
यह नई व्यवस्था अस्पताल के पुराने इमरजेंसी वार्ड में स्थापित की गई है, जहाँ विशेष रूप से श्वसन रोगियों के लिए 20 बेड आरक्षित किए गए हैं। इस इकाई को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। यहाँ भर्ती होने वाले मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) और आपातकालीन प्रबंधन की पूरी सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। इस समर्पित इकाई के शुरू होने से पहले, सांस संबंधी गंभीर मरीजों को मेडिसिन इमरजेंसी में भर्ती किया जाता था, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाने में समय लगता था, जिससे उपचार में देरी होती थी। अब एक ही छत के नीचे विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में तत्काल इलाज संभव हो सकेगा।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह और टीबी एवं फेफड़ा रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. चौधरी ने बताया कि इस केंद्र का उद्देश्य न केवल सामान्य अस्थमा और टीबी का इलाज करना है, बल्कि जटिल श्वसन रोगों का निदान और प्रबंधन भी करना है। इस इकाई में निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण समेत सभी प्रकार के सांस रोगों का त्वरित उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, ब्रोंकोस्कोपी और थोराकोस्कोपी जैसी उन्नत जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का समय पर पता लगाना संभव होगा। खर्राटे और नींद में सांस रुकने जैसी समस्याओं के निदान के लिए स्लीप स्टडी की सुविधा भी इस केंद्र का हिस्सा होगी।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में, विशेषकर उत्तर भारत के शहरों में वायु प्रदूषण एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरा है। पटना में भी प्रदूषण का स्तर अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता है, जिससे अस्थमा और अन्य क्रॉनिक श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। कई बार स्थिति गंभीर होने पर मरीजों को तत्काल आईसीयू और विशेषज्ञ देखभाल की जरूरत पड़ती थी, जिसके अभाव में उन्हें महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। इस 24 घंटे की आपातकालीन सेवा के शुरू होने से ऐसे मरीजों को अब पीएमसीएच में ही समुचित और समय पर इलाज मिल सकेगा, जिससे उनकी परेशानी और खर्च दोनों कम होंगे।
इस नई रेस्पिरेटरी इमरजेंसी के शुरू होने से बिहार की स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। यह न केवल पीएमसीएच पर पड़ने वाले बोझ को व्यवस्थित करेगा, बल्कि राज्य भर से आने वाले गंभीर मरीजों को एक विश्वसनीय और विशेषज्ञ उपचार केंद्र भी प्रदान करेगा। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह इकाई श्वसन संबंधी रोगों के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगी और हजारों मरीजों को नया जीवन देने में सफल होगी। अस्पताल प्रशासन का यह निर्णय सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भविष्य में ऐसी और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
Source: jagran