IGI पर विमान टकराने मामले में DGCA की बड़ी कार्रवाई, ड्यूटी से हटाए गए ट्रैफिक कंट्रोल अधिकारी और पायलट
16 अप्रैल 2026
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया। टैक्सींग के दौरान स्पाइसजेट का विमान अकासा एयर के स्थिर विमान से टकरा गया।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक ग्राउंडिंग हादसे के बाद बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को हुई इस घटना में दो विमानों के आपस में टकराने के बाद, डीजीसीए ने जांच पूरी होने तक एक हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) अधिकारी और स्पाइसजेट के पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया है। यह कदम विमानन सुरक्षा के प्रति नियामक की गंभीरता को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि जांच प्रक्रिया किसी भी तरह से प्रभावित न हो। यह घटना हवाई अड्डे पर जमीनी संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह हादसा गुरुवार दोपहर को टर्मिनल-1 के पास उस समय हुआ जब लेह से आया स्पाइसजेट का एक बोइंग 737-700 विमान टैक्सी कर रहा था। टैक्सीवे पर आगे बढ़ते समय स्पाइसजेट के विमान का दाहिना पंख (विंगलेट) हैदराबाद के लिए उड़ान भरने को तैयार खड़े अकासा एयर के एक स्थिर विमान के पिछले हिस्से (बाएं हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर) से टकरा गया। टक्कर के समय अकासा एयर का विमान पुशबैक के बाद इंजन चालू करने की अनुमति की प्रतीक्षा में खड़ा था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी भी यात्री या चालक दल के सदस्य को कोई चोट नहीं आई और सभी को सुरक्षित विमान से उतार लिया गया।
घटना के तुरंत बाद, हवाई अड्डे पर सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए। दोनों विमानों को हुए नुकसान का आकलन करने और विस्तृत तकनीकी जांच के लिए उन्हें तत्काल सेवा से हटा दिया गया है। स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि उनके विमान को नुकसान पहुंचा है और उसे ग्राउंड कर दिया गया है। वहीं, अकासा एयर ने बताया कि उनका विमान स्थिर था जब दूसरे विमान ने संपर्क किया और वे अपने यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था कर रहे हैं। यह घटना देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक पर हुई, जिससे कुछ समय के लिए परिचालन में मामूली बाधा उत्पन्न हुई।
डीजीसीए ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह घटना ग्राउंड मूवमेंट के दौरान समन्वय की कमी का परिणाम हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, एटीसी ने स्पाइसजेट के पायलट को आगे बढ़ने की अनुमति दी थी, लेकिन मोड़ लेते समय विमानों के बीच पर्याप्त दूरी का सही आकलन नहीं हो सका। जांच में अब फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के साथ-साथ संबंधित एटीसी लॉग और ग्राउंड स्टाफ के बयानों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि गलती के सटीक कारण का पता चल सके।
इस घटना ने एक बार फिर व्यस्त हवाई अड्डों पर बढ़ते दबाव और जमीनी संचालन के दौरान अत्यधिक सतर्कता की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञ इसे मानवीय त्रुटि और प्रक्रियात्मक चूक का संभावित मामला मान रहे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए डीजीसीए की जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच पूरी होने के बाद, नियामक हवाई यातायात नियंत्रकों, पायलटों और ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा दिशानिर्देश जारी कर सकता है ताकि हवाई यात्रा की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
Source: jagran